In my Thirties Era


 अब मैं thirties में हूँ। 

अब फेसबुक पर हर किसी को फ्रेंड request नहीं भेजती  । 

अब सुकून की परिभाषा बदल सी गयी है . 

जैसे ,  नयी साफ़ सुथरी चद्दर बिछाने पर जो सुकून मिलता है. 

           घर की चीज़ों और कपड़ो को organized करने में जो सुकून मिलता है . 

           sprituality पर काम करने में जो सुकून मिलता है . 

अब बर्थडे केक काटने का मन कहाँ करता है  , 

अब लगता है की जन्मदिन पर कहीं घूमने जाएँ और कुछ नया सीखते हुए यादें इकट्ठी करें । 

अब चमक धमक नहीं ,  सादी  चीज़ें ही अच्छी  लगती हैं . 

अब लगता है कि 10 toxic लोगों के बीच रहने सेअच्छा शान्ति से खुद का साथ ही सही है . 

अब लोगों की बातें  सिर्फ सुनती नहीं हूँ ,  बल्कि उनसे कुछ न कुछ सीखती हूँ   

अब मेरी सुबह tv में हाई वॉल्यूम पर गाने सुनने से नहीं बल्कि बेटी की मुस्कराहट से होती है .  

अब जो चीज़ें पहले पसंद नहीं थी वो पसंद आने लगी हैं . 

जो चीज़े पहले  पसंद थी उनसे  मन भर सा गया है . 

अब मैं thirties में हूँ . 

बहुत  कुछ बदल सा  गया है .  




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